पिछले चार सालों से मैं नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की भाजपा सरकार का कट्टर विरोधी रहा हूं।

पिछले चार सालों से मैं नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की भाजपा सरकार का कट्टर विरोधी रहा हूं।

अब लगने लगा है कि मेरा वह विरोध अकारण ही था। मेरी कमअक्ली की उपज। सरकार के चार साल पूरे होने के बाद उसके पक्ष में दर्जनों भाजपाईयों मित्रों के तर्क सुनने और देश की ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर थोड़ा अलग तरीके से विचार करने के बाद मुझे लगा कि मेरा मोदी सरकार का विरोध देश के छद्म और अराजक बुद्धिजीवियों से ही प्रेरित था। भक्तों के अंतर्मन में झांक लेने के बाद अब मुझे साफ-साफ दिखने लगा है कि मोदी जी और उनके भक्तों के बारे में मुझे इस तरह एकतरफा नहीं सोचना चाहिए था। उनकी सरकार जो कुछ भी कर रही है, देश के भले के लिए ही कर रही है। वह हमसे ज्यादा दूरदर्शिता से सोच पा रही है और वहां तक सोच पा रही है, जहां तक आप और हम नहीं सोच सकते। उदाहरण के लिए :कुछ ही मामलों को ले लें !

देश में पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से देश की आम जनता और बुद्धिजीवी इसलिए परेशान हैं क्योंकि इस मूल्यवृद्धि के पीछे के पवित्र उद्देश्य को वे समझ नहीं पा रहे। दरअसल ईंधन बढ़ते हुए दाम मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक है। आपको याद होगा कि पिछले चुनाव से पहले मोदी जी ने देश के हर नागरिक के खाते में पंद्रह-पंद्रह लाख डालने का वादा किया था। दुर्भाग्य से सत्ता में आने के बाद वे अपना वादा पूरा नहीं कर सके। उनके आते-आते विदेशों में जमा सारा काला धन मनमोहन सरकार सफेद करवा चुकी थी। देश का खज़ाना जवाहर लाल नेहरू पहले ही खाली करके गए थे। गलती कांग्रेसियों की सही, लेकिन हमारे मोदी जी के भीतर देशवासियों से वादाखिलाफी का दर्द गहरा है। वे बेमन से पेट्रोल और डीजल का भाव इसीलिए लगातार बढ़ा रहे हैं ताकि उनके ख़ज़ाने में इस साल तक इतने पैसे आ जायं कि अगले चुनाव से से पहले वे देश के लोगों से पांच साल पहले किया हुआ अपना वादा पूरा कर सकें।

अपने वादे के मुताबिक़ मोदी जी हर साल एक या दो करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी देनी थी। वे नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि इसके पहले वे देश से भ्रष्टाचार मिटाने का अपना संकल्प पूरा करना चाहते हैं। भ्रष्टाचार बेरोजगारी से ज्यादा गंभीर मसला है। अगर उनके कार्यकाल में सरकार के पांच-दस करोड़ पद खाली रहेंगे तो भ्रष्टाचार में खुद-ब-खुद गिरावट आ जाएगी। न मिलेगी नौकरी, न होगा भ्रष्टाचार। इससे सरकार का भारी खर्च भी बचेगा जिसका इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं को भविष्य में वृद्धावस्था पेंसन देने में किया जा सकता है। जवानों से ज्यादा देखभाल की जरूरत बुजुर्ग नागरिकों को ही तो होती है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी का एक सकारात्मक असर यह भी होगा कि इससे देश के युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ेगी। खाली पैठे युवक बड़े पैमाने पर संघ, बजरंग दल, हिन्दू सेना, विएचपी जैसे संगठनों में जाएंगे और इस तरह पूरा देश भारत माता की जय, बन्दे मातरम् और गो माता की जय के नारों से गुंजायमान हो उठेगा।

मोदी जी की सरकार पर देश के बुद्धिजीवियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि यह सरकार फासीवादी है और इसमें भिन्न विचारों के प्रति घोर असहिष्णुता है। गहराई से सोचिये तो इस आरोप में भी आपको दम नहीं दिखेगा। भिन्न विचारों के प्रति मोदी जी इतने उदार हैं कि खुद उनकी पार्टी में घनघोर वैचारिक मतभिन्नता है। मोदी जी ‘सबका साथ, सबका विकास” चाहते हैं। दूसरी तरफ उनके नब्बे प्रतिशत भक्त और पार्टी के सहयोगी संघी मानते हैं कि मुसलमानों के रहते इस देश का विकास संभव नहीं। ज्यादातर भाजपाईयों और संघियों की इच्छा मुसलमानों और उनके समर्थन में खड़े धर्मनिरपेक्ष लोगों को को पाकिस्तान खदेड़ देने की है, लेकिन भीतर से उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए भी मोदी जी बाहर से उनकी इस इच्छा की निंदा करते हैं। सरकार स्त्रियों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन उसी पार्टी के एक बड़े नेता का विचार है कि स्त्री यदि मुसलमान है तो कब्र से निकालकर भी उसके साथ बलात्कार किया जा सकता है। पार्टी के ज्यादातर लोग दुष्ट पाकिस्तान से दो-दो हाथ कर लेने के पक्षधर हैं, लेकिन सरकार के लोग युद्ध की जगह पाकिस्तान को अपनी कूटनीति से दुनिया भर में अकेला करके छोड़ देना बेहतर समझते हैं। विचारों में इतने वैविध्य के बावजूद सरकार, पार्टी और संघ में सब कुछ मजे में चल रहा है। कहीं कोई लफड़ा नहीं। यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं तो और क्या है ?

मुझ सहित देश के ज्यादातर लोगों को लगता रहा था कि मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति गलत है। अभी-अभी पाकिस्तान प्रायोजित आतंक का जवाब देने के लिए मोदी जी ने जो कदम उठाया है, उसने तो मुझ जैसे उनके कट्टर विरोधी को भी उनका मुरीद बना दिया है। पाकिस्तान से हाफ़िज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन और दाऊद इब्राहिम जैसे आतंकियों को मंगाने की जगह वहां से मीठी चीनी की बड़ी-बड़ी खेप मंगाकर उन्होंने ऐसा कूटनीतिक दाव खेला है जिसके अंजाम का खुद मूर्ख पाकिस्तानियों को भी पता नहीं है। होगा यह कि पाकिस्तान की तमाम चीनी आहिस्ता-आहिस्ता मोदी जी खींचकर भारत ले आएंगे और आने वाली ईद में ससुरे पाकिस्तानियों को फीकी सेवईया ही खानी पड़ेगी। इससे वहां के तमाम मुल्ले विद्रोह पर उतरेंगे और देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे। पाकिस्तान के बाहर अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत उसकी अलग से बेइज्जती करेगा जिसके बाद हारकर उसके पास भारत से संधि कर लेने के अलावा कोई चारा नहीं रहे जाएगा।

मोदी जी की सरकार पर और भी बहुत सारे आरोप लगाए जा सकते हैं। लगाए जाते भी रहे हैं। ये आरोप हमारी अपनी अदूरदर्शिता के सिवा कुछ भी नहीं। मोदी सरकार का विरोध करने के लिए भी मोदी जी जैसी दूरदृष्टि चाहिए। सरकार इतनी मूर्ख नहीं जितनी लोग सोचते हैं। आप भी अगर मोदी जी की सरकार के विरोधी हैं तो कृपा करके उसके द्वारा अब तक किए गए कामों को गहराई में जाकर परखें। इससे आपकी दृष्टि भी साफ़ होगी और देश भर से भक्तों की कृपा भी आपपर बरसनी भी शुरू हो जायेगी।

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Story

एक लड़की की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ एक सिधे
साधे लड़के से की जाती है जिसके घर मे एक मां के आलावा
और कोई नहीं है।
दहेज मे लड़के को बहुत सारे उपहार और पैसे मिले होते हैं ।
लड़की किसी और लड़के से बेहद प्यार करती थी और लड़का
भी…
लड़की शादी होके आ गयी अपने ससुराल…सुहागरात के
वक्त लड़का दूध लेके आता है तो दुल्हन सवाल पूछती है
अपने पति से…एक पत्नी की मर्जी के बिना पति उसको
हाथ लगाये तो उसे बलात्कार कहते है या हक?
पति – आपको इतनी लम्बी और गहरी जाने की कोई
जरूरत नहीं है..
बस दूध लाया हूँ पी लिजीयेगा.. . हम सिर्फ आपको शुभ
रात्रि कहने आये थे कहके कमरे से निकल जाता है। लड़की
मन मारकर रह जाती है क्योंकि लड़की चाहती थी की
झगड़ा हो ताकी मैं इस गंवार से पिछा छुटा सकूँ ।
है तो दुल्हन मगर घर का कोई भी काम नहीं करती। बस
दिनभर online रहती और न जाने किस किस से बातें
करती मगर उधर लड़के की माँ बिना शिकायत के दिन भर
चुल्हा चौका से लेकर घर का सारा काम करती मगर हर
पल अपने होंठों पर मुस्कुराहट लेके फिरती । लड़का एक
कम्पनी मे छोटा सा मुलाजीम है और बेहद ही मेहनती और
इमानदार। करीब महीने भर बित गये मगर पति पत्नी
अब तक साथ नहीं सोये… वैसे लड़का बहुत शांत स्वाभाव
वाला था इसलिए वह ज्यादा बातें नहीं करता था, बस
खाने के वक्त अपनी पत्नी से पूछ लेता था कि… .कहा
खाओगी..अपने कमरे मे या हमारे साथ। और सोने से पहले
डायरी लिखने की आदत थी जो वह हर रात को लिखता
था।
ऐसे लड़की के पास एक स्कूटी था वह हर रोज बाहर
जाती थी पति के अफीस जाने के बाद और पति के वापस
लौटते ही आ जाती थी। छुट्टी का दिन था लड़का भी
घर पे ही था तो लड़की ने अच्छे भले खाने को भी गंदा
कहके मा को अपशब्द बोलके खाना फेंक देती है मगर वह
शांत रहने वाला उसका पति अपनी पत्नी पर हाथ उठा
देता है मगर माँ अपने बेटे को बहुत डांटती है। इधर
लड़की को बहाना चाहिए था झगड़े का जो उसे मिल गया
था, वह पैर पटकती हुई स्कूटी लेके निकल पड़ती है। लड़की
जो रोज घर से बाहर जाती थी वह अपने प्यार से मिलने
जाती थी, लड़की भले टूटकर चाहती थी लड़के को मगर
उसे पता था की हर लड़की की एक हद होती है जिसे
इज्जत कहते है वह उसको बचाये रखी थी। इधर लड़की
अपने प्यार के पास पहुँचकर कहती है।
अब तो एक पल भी उस घर मे नहीं रहना है मुझे । आज
गंवार ने मुझपर हाथ उठाके अच्छा नही किया ।
लड़का – अरे तुमसे तो मैं कब से कहता हूँ की भाग चलो मेरे
साथ कहीं दूर मगर तुम हो की आज कल आज कल पे लगी
रहती हो।
लड़की – शादी के दिन मैं आई थी तो तुम्हारे पास। तुम
ही ने तो लौटाया था मुझे ।
लड़का – खाली हाथ कहा तक भागोगे तुम ही बोलो..मैंने
तो कहा था कि कुछ पैसे और गहने साथ ले लो तुम तो
खाली हाथ आई थी।
आखिर दूर एक नयी जगह मे जिंदगी नये सिरे से शुरू करने के
लिए पैसे तो चाहिए न?
लड़की – तुम्हारे और मेरे प्यार के बारे मे जानकर मेरे
घरवालो ने बैंक के पास बुक एटी एम और मेरे गहने तक रख
लिये थे। तो मैं क्या लाती अपने साथ । हम दोनों मेहनत
करके कमा भी तो सकते थे।
लड़का – चलाकर इंसान पहले सोचता है और फिर काम
करता है। खाली हाथ भागते तो ये इश्क का भूत दो दिन
मे उतर जाता समझी?
और जब भी तुम्हें छुना चाहता हूँ बहुत नखरे है तुम्हारे ।
बस कहती हो शादी के बाद ।
लड़की – हाँ शादी के बाद ही अच्छा होता है ये सब और
सब तुम्हारा तो है। मैं आज भी एक कुवारी लड़की हूँ ।
शादी करके भी आज तक उस गंवार के साथ सो न सकी
क्योंकि तुम्हें ही अपना पति मान चुकी हूँ बस तुम्हारे
नाम की सिंदूर लगानी बाकी है। बस वह लगा दो सबकुछ
तुम अपनी मर्जी से करना।
लड़का – ठीक है मैं तैयार हूँ । मगर इस बार कुछ पैसे जरूर
साथ लेके आना, मत सोचना हम दौलत से प्यार करते हैं ।
हम सिर्फ तुमसे प्यार करते है बस कुछ छोटी मोटी
बिजनेस के लिए पैसे चाहिए ।
लड़की – उस गंवार के पास कहा होगा पैसा, मेरे बाप से
3 लाख रूपया उपर से मारूती कार लि है।
बस कुछ गहने है वह लेके आउगी आज।
लड़का लड़की को होटल का पता देकर चला जाता है ।
लड़की घर आके फिर से लड़ाई करती है।
मगर अफसोस वह अकेली चिल्लाती रहती है उससे लड़ने
वाला कोई नहीं था।
रात 8 बजे लड़के का मैसेज आता है वाटसप पे की कब आ
रही हो?
लड़की जवाब देती है सब्र करो कोई सोया नहीं है। मैं
12 बजे से पहले पहुँच जाउगी क्योंकि यंहा तुम्हारे बिना
मेरी सांसे घुटती है।
लड़का -ओके जल्दी आना। मैं होटल के बाहर खड़ा रहूंगा
bye

लड़की अपने पति को बोल देती है की मुझे खाना नहीं
चाहिए मैंने बाहर खा लिया है इसलिए मुझे कोई परेशान
न करे इतना कहके दरवाजा बंद करके अंदर आती है
की…पति बोलता है की…वह आलमारी से मेरी डायरी दे
दो फिर बंद करना दरवाजा। हम परेशान नहीं करेंगे ।
लड़की दरवाजा खोले बिना कहती है की चाभीया दो
अलमारी की,
लड़का – तुम्हारे बिस्तर के पैरों तले है चाबी ।
मगर लड़की दरवाजा नहीं खोलती वल्की जोर जोर से
गाना सुनने लगती है। बाहर पति कुछ देर दरवाजा
पिटता है फिर हारकर लौट जाता है। लड़की ने बड़े जोर
से गाना बजा रखा था। फिर वह आलमारी खोलके देखती
है जो उसने पहली बार खोला था, क्योंकि वह अपना
समान अलग आलमारी मे रखती थी।
आलमारी खोलते ही हैरान रह जाती है। आलमारी मे
उसके अपने पास बुक एटी एम कार्ड थे जो उसके घरवालो
ने छीन के रखे थे
खोलके चेक किया तो उसमें वह पैसे भी एड थे जो दहेज मे
लड़के को मिले थे। और बहुत सारे गहने भी जो एक पेपर के
साथ थे और उसकी मिल्कीयेत लड़की के नाम थी, लड़की
बेहद हैरान और परेशान थी। फिर उसकी नजर डायरी मे
पड़ती है और वह जल्दी से
वह डायरी निकालके पढ़ने लगती है।
लिखा था, तुम्हारे पापा ने एक दिन मेरी मां की जान
बचाइ थी अपना खून देकर । मैं अपनी माँ से बेहद प्यार
करता हूँ इसलिए मैंने झूककर आपके पापा को प्रणाम करके
कहा की…आपका ये अनमोल एहसान कभी नही भूलूंगा, कुछ
दिन बाद आपके पापा हमारे घर आये हमारे तुम्हारे
रिश्ते की बात लेकर मगर उन्होंने आपकी हर बात बताई
हमें की आप एक लड़के से बेहद प्यार करती हो। आपके
पापा आपकी खुशी चाहते थे इसलिए वह पहले लड़के को
जानना चाहते थे। आखिर आप अपने पापा की princess
जो थी और हर बाप अपने Princess के लिए एक अच्छा
इमानदार Prince चाहता है। आपके पापा ने खोजकर के
पता लगाया की वह लड़का बहुत सी लड़की को धोखा दे
चुका है। और पहली शादी भी हो चुकी है पर आपको बता
न सके क्योंकि उन्हें पता था की ये जो इश्क का नशा है
वह हमेशा अपनों को गैर और गैर को अपना समझता है।
ऐक बाप के मुँह से एक बेटी की कहानी सुनकर मै अचम्भीत
हो गया। हर बाप यंहा तक शायद ही सोचे। मुझे यकीन
हो गया था की एक अच्छा पति होने का सम्मान मिले न
मिले मगर एक दामाद होने की इज्जत मैं हमेशा पा सकता
हूँ।
मुझे दहेज मे मिले सारे पैसे मैंने तुम्हारे ए काउण्ट मे कर
दिए और तुम्हारे घर से मिली गाड़ी आज भी तुम्हारे घर
पे है जो मैंने इसलिए भेजी ताकी जब तुम्हें मुझसे प्यार हो
जाये तो साथ चलेंगे कही दूर घूमने। दहेज…इस नाम से
नफरत है मुझे क्योंकि मैंने इ दहेज मे अपनी बहन और बाप
को खोया है। मेरे बाप के अंतिम शब्द भी येही थे
की..कीसी बेटी के बाप से कभी एक रूपया न लेना। मर्द
हो तो कमाके खिलाना, तुम आजाद हो कहीं भी जा
सकती हो। डायरी के बिच पन्नों पर तलाक की पेपर है
जंहा मैंने पहले ही साईन कर दिया है । जब तुम्हें लगे की
अब इस गंवार के साथ नही रखना है तो साईन करके कहीं
भी अपनी सारी चिजे लेके जा सकती हो।
लड़की …हैरान थी परेशान थी…न चाहते हुए भी गंवार के
शब्दों ने दिल को छुआ था। न चाहते हुए भी गंवार के
अनदेखे प्यार को महसूस करके पलके नम हुई थी।
आगे लिखा था, मैंने तुम्हें इसलिए मारा क्योंकि आपने मा
को गाली दी, और जो बेटा खुद के आगे मा की बेइज्जती
होते सहन कर जाये…फिर वह बेटा कैसा ।
कल आपके भी बच्चे होंगे । चाहे किसी के साथ भी हो, तब
महसूस होगी माँ की महानता और प्यार।
आपको दुल्हन बनाके हमसफर बनाने लाया हूँ जबरजस्ती
करने नहीं। जब प्यार हो जाये तो भरपूर वसूल कर लूँगा
आपसे…आपके हर गुस्ताखी का बदला हम शिद्दत से लेंगे हम
आपसे…गर आप मेरी हुई तो बेपनाह मोहब्बत करके
किसी और की हुई तो आपके हक मे दुवाये माँग के
लड़की का फोन बज रहा था जो भायब्रेशन मोड पे था,
लड़की अब दुल्हन बन चुकी थी। पलकों से आशू गिर रहे थे ।
सिसकते हुए मोबाइल से पहले सिम निकाल के तोड़ा फिर
सारा सामान जैसा था वैसे रख के न जाने कब सो गई पता
नहीं चला। सुबह देर से जागी तब तक गंवार अफीस जा
चुका था, पहले नहा धोकर साड़ी पहनी । लम्बी सी
सिंदूर डाली अपनी माँग मे फिर मंगलसूत्र ।
जबकि पहले एक टीकी जैसी साईड पे सिंदूर लगाती थी
ताकी कोई लड़का ध्यान न दे
मगर आज 10 किलोमीटर से भी दिखाई दे ऐसी लम्बी
और गाढी सिंदूर लगाई थी दुल्हन ने। फिर किचन मे जाके
सासुमा को जबर्दस्ती कमरे मे लेके तैयार होने को कहती
है। और अपने गंवार पति के लिए थोड़े नमकीन थोड़े हलुवे
और चाय बनाके अपनी स्कूटी मे सासुमा को जबर्दस्ती
बिठाकर (जबकी कुछ पता ही नहीं है उनको की बहू आज
मुझे कहा ले जा रही है बस बैठ जाती है)
फिर रास्ते मे सासुमा को पति के अफीस का पता पूछकर
अफीस पहुँच जाती है। पति हैरान रह जाता है पत्नी को
इस हालत मे देखकर।
पति – सब ठीक तो है न मां?
मगर माँ बोलती इससे पहले पत्नी गले लगाकर कहती है
की..अब सब ठीक है…I love you forever…
अफीस के लोग सब खड़े हो जाते है तो दुल्हन कहती है
की..मै इनकी धर्मपत्नी हूँ । बनवास गई थी सुबह लौटी
हूँ
अब एक महीने तक मेरे पतिदेव अफीस मे दिखाई नहीं देंगे
अफीस के लोग? ?????
दुल्हन – क्योंकि हम लम्बी छुट्टी पे जा रहे साथ साथ।
पति- पागल…
दुल्हन – आपके सादगी और भोलेपन ने बनाया है।
सभी लोग तालीया बजाते हैं और दुल्हन फिर से लिपट
जाती है अपने गंवार से …
जंहा से वह दोबारा कभी भी छूटना नहीं चाहती।
* बड़े कड़े फैसले होते है कभी कभी हमारे अपनों की मगर
हम समझ नहीं पाते की…हमारे अपने हमारी फिकर खुद से
ज्यादा क्यों करते हैं*
* मां बाप के फैसलों का सम्मान करे*
क्योंकि ये दो ऐसे शख्स है जो आपको हमेशा दुनियादारी
से ज्यादा प्यार करते हैं ।

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देशभक्ति मानसिकता

देशभक्ति मानसिकता की असलियत जरूर पढ़ें
औरत के शरीर की ये जो दो गांठें है ना, ये दरअसल है तो इसलिए ताकि वो अपने बच्चे को दूध पिला सके, एक नयी जिंदगी का सर्जन कर सके, लेकिन यहि गाँठ पुरुषों के दिमाग ट्यूमर है, ये गाँठ ट्यूमर की तरह हर पुरुष के दिमाग में है, फिर वो पुरुष चाहे ट्रेफिक सिग्नल पर भीख माँगता भिखारी हो, अपने एयरकंडीशनर ऑफिस में बैठा बिज़नसमैन हो, सीमा पर खड़ा जवान हो, चाहे देश के सर्वोच्च पद पर बैठा कोई व्यक्ति हो !

कुछ दिन पहले विधा बालन ने सिर्फ इतना कहा था ‘एक आर्मी जवान लगातार मेरे ब्रेस्ट को घूर रहा था’
और भक्त मंडली इसे आर्मी का अपमान बताने लगी !
इसमे आर्मी का अपमान कहाँ हो गया ?

आर्मी में जाने वाले लोग भी इसी विकृत मानसिकता वाले समाज का हिस्सा है और एक आर्मी वाले की मानसिकता एक आम सिविलियन से कहीँ ज्यादा विकृत या यूँ कहे अपोजिट जेंडर को लेकर ज्यादा कुंठित होती है !
इसके लिए भी सरकारी नीतियां हि जिम्मेदार है, एक तो लगातार घर से दूर और विषम परिस्तिथियों में रहते हुऐ आर्मी वाले मानसिक अवसाद का शिकार रहते है, और दूसरा जहाँ भी सैनिको को विशेष अधिकार मिले है वहाँ ये सबको अपना गुलाम समझते है नक्सल प्रभावित इलाके में ये लड़कियों के ब्रेस्ट दबाकर उनमें से दूध निचोड़ कर जाँच करते है की लड़की नक्सली तो नहीँ ! यहाँ आर्मी वालों द्वारा किसी भी महिला का रेप होना बिलकुल सामान्य घटना है बिलकुल ऐसे हि हालात कश्मीर और उत्तरपूर्व में है !
लगातार ऐसे माहौल में रहने की वजह से इनमें से अधिकतर का व्यवहार बिलकुल तानाशाह की तरह हो जाता है !
ऐसा भी नहीँ की सारे सैनिक ऐसे हि होते है, जैसे सारे पुरुष बलात्कारी नहीँ होते, सारे नेता चोर नहीँ होते उसी तरह सारे सैनिक भी ऐसे नहीँ होते ! लेकिन हाँ इतना जरुर है सेक्स को लेकर इनकी मानसिकता आम लोगों से कहीँ ज्यादा विकृत रहती है !
तो सेना का ये महिमामंडन बंद कीजिए, सेना को पूजना और और उसे देश और समाज से ऊपर रखना बंद कीजिए !

सेना में जाने का कारण कोई देशभक्ति नहीं बल्कि बेरोज़गारी के दौर में रोजगार और सेना की सैलरी होती है !
लिखकर रख लीजिए किसीभी आर्मी वाले को किसी दूसरे संस्थान में छोटी नौकरी भी मिल जाये तो वो तुरंत सेना को छोड़ देगा !
फर्जी देशभक्त जो सेना की पूजा करके एक घातक संस्कृति को बढ़ावा दे रहे है मैं उनको चैलेंज कर
रहा हूँ –
इनमें से कोई भी देशभक्त ट्रेन के किसी ऐसे कम्पार्टमेंट जिसमे छ में से चार सीट पर आर्मी वाले हो उसमे अपनी माँ बहन बेटी के साथ यात्रा करके बताये !
इन लोगों का कभी कभी जंगलों की सेना से सामना नही हुआ, कभी गडचिरोली,अहेरी, बस्तर, लालगढ की सड़कों पर 7 बजे के बाद परिवार के साथ निकलिए, जायका लीजिए कभी सेना की खातिरदारी का !
अगर ये नहीँ कर पाओ तो, राष्ट्रवाद के नाम पर गंध फैलाना बंद कीजिए ! राष्ट्रवाद की ऐसी गंध जिसमें खुदको देशभक्त साबित करने के लिए भी एक महिला का चरित्र हनन करना पड़े ! एक पीढ़ित को हो आरोपी बनाना पड़े !
आप भी इंसान है जानवर नहीँ इसलिए भेड़ बकरियों की तरह आपको संचालित करने वाले चंद गड़रियों के पीछे चलना बंद कीजिए !

नक्सली, आतंकी, पत्थरबाज किसी खेत में नहीं पैदा होते ! ना वो किसी असेम्बली लाइन वाली फैक्ट्री से ‘मॉस प्रोड्यूस’ हो के आते हैं ! सो महान देशभक्तों, सोचो कि ये हजारो लड़के, लडकियाँ, महिला, पुरुष हथियार लेके अपनी भी जान दांव पर लगा के यूं ही नहीं कूद पड़ते !

वो आते है क्योंकि तुम्हारी सेना अम्बानी, अडाणी जैसो के आदेश पर सरकार की और से, सरकारी आतंकी के तौर पर काम करती है ! उनकी लड़कियों और महिलाओं को सेक्स स्लेव समझती है और पुरूषों को गुलाम !
कभी सोचा है, क्यूं आदिवासी महिलाएँ आर्मी मुख्यालय के आगे नग्न होकर प्रदर्शन करती है और कहती है रेप अस ?
कभी सोचा है आर्मी वालों की हत्या के बाद महिला नक्सली घृणा से क्यूँ उनके लिंग काट देती है ?
कश्मीर से लेकर छत्तीसगढ़, झारखंड, असम जहाँ कहीं भी सेना को विशेषाधिकार मिले वहाँ हर घर में एक सोनी सोरी एक मकड़म हिड़मे मिलेगी !

अभी मेजर गोगोई के बचाव में खड़े हो, कौन है गोगोई ?
वहि न जिसने एक नाबालिग लड़की के बड़े भाई को आतंकी बताकर तड़पा तड़पाकर मार दिया और अपने छोटे भाई को बचाने के लिए उस नाबालिग लड़की को गोगोई के साथ होटल में आने को मजबूर होना पड़ा ! वही गोगोई जो आधी रात को जाँच के बहाने किसीके घर में भी घुस जाता है !

अन्याय की पराकाष्ठा और न्याय की कीमत चुकाने में असमर्थता से उपजी असहाय स्थिति के गर्भ में पलकर नक्सलियों और पत्थरबाजो की पैदाइश हुई है !
ये सब देख कर क्या एक कुढ़न पैदा नहीं होती ?
अगर आपमे इंसानियत जिंदा होती तो समझते की ऐसी स्तिथि में जिंदगी बोझ लगने लगती है और अपनी असहाय स्थिति का कोफ़्त भरा एहसास होता है !
ये घुटन, अत्याचार और फिर जीने के लिए गिड़गिड़ाना…
उनकी विनती कोई सुनता नहीं, न्याय
के लिए पैसे नहीं, इस सबसे घृणा पैदा होती है और उस घृणा से नक्सलियों, आतंकियों और पत्थरबाजो की पैदाइश !

अगर इस देश को बचाना है और देश को बचाने से भी बढ़कर यदि आपमे इंसानियत जिंदा है तो, सेना का महिमामंडन बंद कीजिए और हर गोगोई के विरोध में खड़े होइये !

…. बाकी मुझे देशद्रोही का सर्टिफिकेट देना चाहो तो….. गो टू हेल…. मुझे तुम्हारे सर्टिफिकेट की जरुरत नहीँ !

Girraj Ved, mamta joshi

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