श्रॆणी पुरालेख: Social

पिछले चार सालों से मैं नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की भाजपा सरकार का कट्टर विरोधी रहा हूं।

पिछले चार सालों से मैं नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की भाजपा सरकार का कट्टर विरोधी रहा हूं।

अब लगने लगा है कि मेरा वह विरोध अकारण ही था। मेरी कमअक्ली की उपज। सरकार के चार साल पूरे होने के बाद उसके पक्ष में दर्जनों भाजपाईयों मित्रों के तर्क सुनने और देश की ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर थोड़ा अलग तरीके से विचार करने के बाद मुझे लगा कि मेरा मोदी सरकार का विरोध देश के छद्म और अराजक बुद्धिजीवियों से ही प्रेरित था। भक्तों के अंतर्मन में झांक लेने के बाद अब मुझे साफ-साफ दिखने लगा है कि मोदी जी और उनके भक्तों के बारे में मुझे इस तरह एकतरफा नहीं सोचना चाहिए था। उनकी सरकार जो कुछ भी कर रही है, देश के भले के लिए ही कर रही है। वह हमसे ज्यादा दूरदर्शिता से सोच पा रही है और वहां तक सोच पा रही है, जहां तक आप और हम नहीं सोच सकते। उदाहरण के लिए :कुछ ही मामलों को ले लें !

देश में पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से देश की आम जनता और बुद्धिजीवी इसलिए परेशान हैं क्योंकि इस मूल्यवृद्धि के पीछे के पवित्र उद्देश्य को वे समझ नहीं पा रहे। दरअसल ईंधन बढ़ते हुए दाम मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक है। आपको याद होगा कि पिछले चुनाव से पहले मोदी जी ने देश के हर नागरिक के खाते में पंद्रह-पंद्रह लाख डालने का वादा किया था। दुर्भाग्य से सत्ता में आने के बाद वे अपना वादा पूरा नहीं कर सके। उनके आते-आते विदेशों में जमा सारा काला धन मनमोहन सरकार सफेद करवा चुकी थी। देश का खज़ाना जवाहर लाल नेहरू पहले ही खाली करके गए थे। गलती कांग्रेसियों की सही, लेकिन हमारे मोदी जी के भीतर देशवासियों से वादाखिलाफी का दर्द गहरा है। वे बेमन से पेट्रोल और डीजल का भाव इसीलिए लगातार बढ़ा रहे हैं ताकि उनके ख़ज़ाने में इस साल तक इतने पैसे आ जायं कि अगले चुनाव से से पहले वे देश के लोगों से पांच साल पहले किया हुआ अपना वादा पूरा कर सकें।

अपने वादे के मुताबिक़ मोदी जी हर साल एक या दो करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी देनी थी। वे नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि इसके पहले वे देश से भ्रष्टाचार मिटाने का अपना संकल्प पूरा करना चाहते हैं। भ्रष्टाचार बेरोजगारी से ज्यादा गंभीर मसला है। अगर उनके कार्यकाल में सरकार के पांच-दस करोड़ पद खाली रहेंगे तो भ्रष्टाचार में खुद-ब-खुद गिरावट आ जाएगी। न मिलेगी नौकरी, न होगा भ्रष्टाचार। इससे सरकार का भारी खर्च भी बचेगा जिसका इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं को भविष्य में वृद्धावस्था पेंसन देने में किया जा सकता है। जवानों से ज्यादा देखभाल की जरूरत बुजुर्ग नागरिकों को ही तो होती है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी का एक सकारात्मक असर यह भी होगा कि इससे देश के युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ेगी। खाली पैठे युवक बड़े पैमाने पर संघ, बजरंग दल, हिन्दू सेना, विएचपी जैसे संगठनों में जाएंगे और इस तरह पूरा देश भारत माता की जय, बन्दे मातरम् और गो माता की जय के नारों से गुंजायमान हो उठेगा।

मोदी जी की सरकार पर देश के बुद्धिजीवियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि यह सरकार फासीवादी है और इसमें भिन्न विचारों के प्रति घोर असहिष्णुता है। गहराई से सोचिये तो इस आरोप में भी आपको दम नहीं दिखेगा। भिन्न विचारों के प्रति मोदी जी इतने उदार हैं कि खुद उनकी पार्टी में घनघोर वैचारिक मतभिन्नता है। मोदी जी ‘सबका साथ, सबका विकास” चाहते हैं। दूसरी तरफ उनके नब्बे प्रतिशत भक्त और पार्टी के सहयोगी संघी मानते हैं कि मुसलमानों के रहते इस देश का विकास संभव नहीं। ज्यादातर भाजपाईयों और संघियों की इच्छा मुसलमानों और उनके समर्थन में खड़े धर्मनिरपेक्ष लोगों को को पाकिस्तान खदेड़ देने की है, लेकिन भीतर से उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए भी मोदी जी बाहर से उनकी इस इच्छा की निंदा करते हैं। सरकार स्त्रियों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन उसी पार्टी के एक बड़े नेता का विचार है कि स्त्री यदि मुसलमान है तो कब्र से निकालकर भी उसके साथ बलात्कार किया जा सकता है। पार्टी के ज्यादातर लोग दुष्ट पाकिस्तान से दो-दो हाथ कर लेने के पक्षधर हैं, लेकिन सरकार के लोग युद्ध की जगह पाकिस्तान को अपनी कूटनीति से दुनिया भर में अकेला करके छोड़ देना बेहतर समझते हैं। विचारों में इतने वैविध्य के बावजूद सरकार, पार्टी और संघ में सब कुछ मजे में चल रहा है। कहीं कोई लफड़ा नहीं। यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं तो और क्या है ?

मुझ सहित देश के ज्यादातर लोगों को लगता रहा था कि मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति गलत है। अभी-अभी पाकिस्तान प्रायोजित आतंक का जवाब देने के लिए मोदी जी ने जो कदम उठाया है, उसने तो मुझ जैसे उनके कट्टर विरोधी को भी उनका मुरीद बना दिया है। पाकिस्तान से हाफ़िज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन और दाऊद इब्राहिम जैसे आतंकियों को मंगाने की जगह वहां से मीठी चीनी की बड़ी-बड़ी खेप मंगाकर उन्होंने ऐसा कूटनीतिक दाव खेला है जिसके अंजाम का खुद मूर्ख पाकिस्तानियों को भी पता नहीं है। होगा यह कि पाकिस्तान की तमाम चीनी आहिस्ता-आहिस्ता मोदी जी खींचकर भारत ले आएंगे और आने वाली ईद में ससुरे पाकिस्तानियों को फीकी सेवईया ही खानी पड़ेगी। इससे वहां के तमाम मुल्ले विद्रोह पर उतरेंगे और देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे। पाकिस्तान के बाहर अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत उसकी अलग से बेइज्जती करेगा जिसके बाद हारकर उसके पास भारत से संधि कर लेने के अलावा कोई चारा नहीं रहे जाएगा।

मोदी जी की सरकार पर और भी बहुत सारे आरोप लगाए जा सकते हैं। लगाए जाते भी रहे हैं। ये आरोप हमारी अपनी अदूरदर्शिता के सिवा कुछ भी नहीं। मोदी सरकार का विरोध करने के लिए भी मोदी जी जैसी दूरदृष्टि चाहिए। सरकार इतनी मूर्ख नहीं जितनी लोग सोचते हैं। आप भी अगर मोदी जी की सरकार के विरोधी हैं तो कृपा करके उसके द्वारा अब तक किए गए कामों को गहराई में जाकर परखें। इससे आपकी दृष्टि भी साफ़ होगी और देश भर से भक्तों की कृपा भी आपपर बरसनी भी शुरू हो जायेगी।

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बेबसी की जुबान

बेबसी की जुबान
दोस्तो_जब_लडकी_के_घरवाले_कैसे_लडके_की_तलाश_करते_है

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एक पार्क मे दो बुजुर्ग बातें कर रहे थे….

पहला :- मेरी एक पोती है, शादी के लायक है… BE किया है, नौकरी करती है, कद – 5″2 इंच है.. सुंदर है
कोई लडका नजर मे हो तो बताइएगा..

दूसरा :- आपकी पोती को किस तरह का परिवार चाहिए…??

पहला :- कुछ खास नही.. बस लडका ME /M.TECH किया हो, अपना घर हो, कार हो, घर मे एसी हो, अपने बाग बगीचा हो, अच्छा job, अच्छी सैलरी, कोई लाख रू. तक हो…

दूसरा :- और कुछ…

पहला :- हाँ सबसे जरूरी बात.. अकेला होना चाहिए..

मां-बाप,भाई-बहन नही होने चाहिए..
वो क्या है लडाई झगड़े होते है…

दूसरे बुजुर्ग की आँखें भर आई फिर आँसू पोछते हुए बोला – मेरे एक दोस्त का पोता है उसके भाई-बहन नही है, मां बाप एक दुर्घटना मे चल बसे, अच्छी नौकरी है, डेढ़ लाख सैलरी है, गाड़ी है बंगला है, नौकर-चाकर है..

पहला :- तो करवाओ ना रिश्ता पक्का..

दूसरा :- मगर उस लड़के की भी यही शर्त है की लडकी के भी मां-बाप,भाई-बहन या कोई रिश्तेदार ना हो…

कहते कहते उनका गला भर आया..
फिर बोले :- अगर आपका परिवार आत्महत्या कर ले तो बात बन सकती है.. आपकी पोती की शादी उससे हो जाएगी और वो बहुत सुखी रहेगी….

पहला :- ये क्या बकवास है, हमारा परिवार क्यों करे आत्महत्या.. कल को उसकी खुशियों मे, दुःख मे कौन उसके साथ व उसके पास होगा…

दूसरा :- वाह मेरे दोस्त, खुद का परिवार, परिवार है और दूसरे का कुछ नही… मेरे दोस्त अपने बच्चो को परिवार का महत्व समझाओ, घर के बडे ,घर के छोटे सभी अपनो के लिए जरूरी होते है… वरना इंसान खुशियों का और गम का महत्व ही भूल जाएगा, जिंदगी नीरस बन जाएगी…

पहले वाले बुजुर्ग बेहद शर्मिंदगी के कारण कुछ नही बोल पाए…

( जब की यह हकीकत है हर लडकी और उसके परिवार वाले ऐसे ही लडके की तलाश करते है इसे कोई नकार नही सकता )

दोस्तों परिवार है तो जीवन मे हर खुशी, खुशी लगती है अगर परिवार नही तो किससे अपनी खुशियाँ और गम बांटोगे।

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भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर विशेष

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर विशेष

घटना नेपाल की है जब पूर्व प्रधानमंत्री स्मृतिशेष श्री राजीव गांधी जी अपनी पत्नी श्रीमती सोनिया गांधी जी के साथ नेपाल दौरे पर गए थे। राजीव गांधी जी दर्शन हेतु नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर चले गए। पुजारियों ने राजीव जी व सोनिया जी को देखकर राजीव जी से कहा कि आप तो बाबा पशुपति नाथ जी का दर्शन कर सकते हैं लेकिन सोनिया जी नही क्योकि वे अभी भी हिन्दू नही हुई हैं।राजीव जी को जब पुजारियों ने यह कहा तो वे पशुपति नाथ का दर्शन किये बगैर वापस चले आये। राजीव गांधी जी के इस कार्य को अखबारों ने मजाकिया लहजे में लिखा कि अभी तक तो पतिब्रता स्त्रियां देखी गईं थी पहली बार कोई पत्नीब्रता पति मिला है।

मैं राजीव गांधी जी के उस निर्णय की सराहना करता हूँ जिसमे उन्होंने अपने व अपनी पत्नी के आत्मसम्मान पर धार्मिक पाखंडों को भारी नही होने दिया।वे पत्नी को श्रेष्ठ स्थान देते हुए पशुपति नाथ का दर्शन करना गवारा नही किये और आलोचना एवं उपहास को झेल लिए लेकिन कथित धार्मिक कुव्यवस्थाओं के समक्ष झुके नही। जैसे भारत के प्रथम नागरिक/राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविद जी को ब्रम्हा मन्दिर में उनके दलित होने के नाते जाने नही दिया गया वैसे ही नेपाल की प्रथम महिला/राष्ट्रपति श्रीमती विद्या देवी भंडारी जी को भी नेपाल में मंदिर में भगवान का दर्शन नही करने दिया गया क्योकि वे ब्राह्मण होने के बावजूद विधवा हैं।

ये घटनाएं किसी भी व्यक्ति के आत्मसम्मान को कितना चोटिल करती हैं,यह शायद बयां नही किया जा सकता है। चाहे राजीव जी हों,रामनाथ कोविद जी हों या विद्या देवी भंडारी जी,वे कहें या न कहे लेकिन इस जलालत से वे कितने आहत होंगे,इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। कोई भी व्यक्ति जब आम होता है और उसके साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो वह सहज रूप में खुद तक अपमानित महसूस कर इसे पी जाता है लेकिन जब वह आम से खास हो जाता है तो उसके लिए ऐसे अपमानजनक व्यवहार मौत से कम नही लगते होंगे।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी से जब सैकड़ो ब्राह्मणों के पैर धुलवा करके चरणामृत पीलवाया गया होगा तो उन्हें भी लगा होगा कि मेरा राष्ट्रपति होना कायस्थ होने के सामने बौना है और उनका ब्राह्मण होना राष्ट्रपति पद पर कई हजार टन भारी सम्पूर्णानन्द जी की मूर्ति का अनावरण जब जगजीवन राम जी ने कर दिया तो उसे ब्राह्मणों ने गंगाजल व दूध से धुलकर पवित्र किया,अखिलेश यादव जी,मायावती जी व मुलायम सिंह यादव जी द्वारा जिस मुख्यमंत्री आवास में रहा गया था वह भी गंगाजल व गोमूत्र से धुलकर पवित्र किया गया तब नए मुख्यमंत्री जी रहना शुरू किए।यह इस देश की जातिगत हीनता और श्रेष्ठता का निम्नतम से निम्नतम रूप है जिससे उबरना मुश्किल ही नही बल्कि दुरूह और असम्भव है।

बाबा साहब डॉ आंबेडकर जी को पत्नी रमा बाई जी की जिद्द पर पंढरपुर मन्दिर में दर्शन हेतु पँहुचने पर डंडा ले पंडो द्वारा खदेड़ दिया गया,विश्वनाथ मंदिर में समाजवादी नेता राजनारायण जी द्वारा दलित प्रवेश कराने पर डंडों से बुरी तरह से उन्हें पीटा गया और करपात्री जी महाराज द्वारा अलग मूर्ति स्थापित की गई। सांसद/आईएएस/एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष रहे पीएल पुनिया जी को पुरी मन्दिर में घुसने ही नही दिया गया। बिहार के मुख्यमंत्री रहे जीतन राम मांझी जी के साथ भी मन्दिर में ऐसा ही बर्ताव किया गया।

महामहिम रामनाथ कोविद जी के साथ पुष्कर में जो वाकया पेश आया है यदि सचमुच सही है तो निहायत ही शर्मनाक है।माननीय कोविद जी को भी अब स्वतन्त्र हों बैटिंग करनी चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति से बड़ा कोई पद नही होता और आप इस पर आसीन हैं।महामहिम कोविद जी अब आपको इतिहास बनाना चाहिए जिसे भारतीय जनमानस हजारो वर्ष तक पढ़े और याद रखे। आप अब किसी के मोहताज नही है सर इसलिए आत्मसम्मान,देश के गौरव,वंचितों के हित व सामाजिक न्याय की मुहिम को तीब्र करना चाहिए।

महामहिम राष्ट्रपति कोविद सर जी! राजीव गांधी जी के बोल्ड निर्णय को उनके न रहने पर भी हम कोड करने को विवश हो गए क्योकि उन्होंने अपने सम्मान पर किसी धार्मिक रूढ़ि को भारी नही पड़ने दिया। आपको भी अब खुलकर सामाजिक विषमताओं पर बोलना व प्रहार करना चाहिए न कि उन्हें आत्मसात कर स्वीकारोक्ति प्रदान करनी चाहिए। या फिर एससी एसटी एक्ट में हुए बदलाव के समय आपने जो चुप्पी साधी थी अब भी वही इरादा है तो फैसला आपका। राजीव गांधी जी पुण्य तिथि पर विशेष।। हमारा अन्य ब्लॉग

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