Abul Kalam Aajad

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद Maulana Abul Kalaam Aazad

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद । दोस्तों, 16 वर्ष के एक दुबले पतले, लड़के ने एक बड़े विद्वान के रूप में, भाषा विशेष की राष्ट्रीय कान्फ्रेंस से, मुख्य वक्ता के रूप में भाषण दिया । इस बालक का नाम अबुल कलाम आज़ाद था । जो आगे चलकर स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष का, एक महान नायक कहलाया ।

जन्म

अबुल कलाम का जन्म, 11 नवंबर सन 1888 ईस्वी को, मक्का में नगर में हुआ था । इनके पिता मौलाना खैरूद्दीन, अरबी भाषा के प्रकांड विद्वान थे । इनकी मां पवित्र नगर मदीना के, मुफ्ती की पुत्री थी । इनका बचपन मक्का मदीना में बीता । इनके घर पर शिक्षा प्रेमियों की, हर समय अपार भीड़ लगी रहती थी । इनका परिवार सन् 1907 में, भारत आ गया । और कोलकाता में बस गया । मौलाना आजाद का प्रारंभिक जीवन, सामान्य बालकों से भिन्न था ।

उनके खेलने का तरीका, दूसरे बच्चों से अलग था । कभी यह घर के सभी बक्सों को, एक लाइन में रखकर, अपनी बहन से कहते, देखो यह रेल गाड़ी है । मैं रेल गाड़ी से उतर रहा हूं । तुम लोग चिल्ला चिल्ला कर कहो, कि हटो हटो रास्ता दो, दिल्ली के मौलाना आ रहे हैं । फिर वह गंभीर मुद्रा में, बक्सों की रेलगाड़ी से धीरे-धीरे, नीचे उतरकर शालीनता से चलते । मानो बड़ी उम्र का कोई सम्मानित व्यक्ति, चल रहा हो ।

पढ़ने लिखने का शौक

आजाद को बचपन से ही, पुस्तकें पढ़ने का बड़ा शौक था । वह जब किसी विषय के अध्ययन में लगते तो, उसमें ऐसा डूबते कि उन्हें, अपने आसपास का भी होश नहीं रहता । वह एक बड़ी कुशाग्र बुद्धि के थे । एक बार जो कुछ पढ़ लेते, वह हमेशा के लिए उन्हें याद हो जाता । वह गणित और साहित्य दर्शन इत्यादि । विषयों का गहन अध्ययन किया था । शायरी और गद्य लेखन का शौक, बचपन से ही उनमें था । अपनी इसी रूची के कारण उन्होंने, समय-समय पर कई पत्र-पत्रिकाएं निकाली ।  और स्वयं उनका संपादन किया । उनकी पहली पत्रिका नैरंग ए आलम है । जिस समय पत्रिका निकली । मौलाना आजाद की आयु मात्र 12 वर्ष की थी ।

प्रसिद्धि

इनकी योग्यता और विविधता से, लोगों का परिचय तब हुआ । जब उन्होंने लिसानुल सिदक, नाम का एक पत्र प्रकाशित किया । इसके माध्यम से वे तत्कालीन, मुस्लिम समाज में फैले अंधविश्वासों, को समाप्त कर उनमें, सुधार लाना चाहते थे । अंजुमन हिदायत उल इस्लाम, के लाहौर अधिवेशन में जाने-माने, लेखकों एवं कवियों  के सामने, 15 वर्ष का एक दुबला-पतला बालक, जिसकी अभी दाढ़ी मूछ का भी, अता पता ना था । बोलने के लिए आगे बढ़ा ।  तो लोगों की आंखें आश्चर्य से, खुली की खुली रह गई । इन्होंने अपनी सधी और संयत भाषा, में विचार व्यक्त करने शुरू किए । तो सभा में सन्नाटा छा गया । उस लड़के ने करीब ढाई घंटे तक, बिना लिखित रूप के, सीधे अपना भाषण दिया ।

इस घटना के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में, अबुल कलाम आजाद की धाक जम गई । इन्होंने कई पत्र पत्रिकाओं का भी संपादन किया । अलनदवा और वकील उन्हीं पत्रिकाओं में से हैं । सन 1912 में उन्होंने अपना प्रसिद्ध, साप्ताहिक अखबार अल हिलाल प्रारंभ किया । यह अखबार, भारत और विदेशों में जल्दी ही, प्रसिद्ध हो गया । उनकी प्रसिद्धि और वर्तमान सरकार के खिलाफ, लिखना । अंग्रेजों को रास नहीं आया । और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । उन्हें 4 साल से अधिक समय तक, रांची में कैद रखा गया ।

कांग्रेस के अध्यक्ष

सन 1923 में मौलाना अबुल कलाम आजाद को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के, विशेष अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया । उस समय उनकी आयु 35 वर्ष की थी । मौलाना आजाद सच्चे राष्ट्रवादी, और  हिंदू – मुस्लिम एकता के पक्षधर थे । ये सन 1940 में, कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए । मौलाना आजाद स्वतंत्रता प्राप्ति, के आंदोलन के समय, यानी 1940 से 47 के बीच अंग्रेजी से हुई । कई वार्ताओं में मुख्य रूप से शामिल रहे ।

भारत के शिक्षा मंत्री

1947 में भारत को आजादी मिलने के पश्चात । जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री, का पद दिया गया । मंत्रिमंडल में मौलाना आजाद को, शिक्षा मंत्री का पद दिया गया । मौलाना आजाद शिक्षा, कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में कई कार्य किए । मौलाना आजाद लगभग 10 वर्ष तक, भारत के शिक्षा मंत्री रहे । उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में देश  का नेतृत्व किया । उन्होंने प्रौढ़ शिक्षा, और महिला शिक्षा पर भी अत्यधिक बल दिया । 22 फरवरी सन 1958 को, मौलाना अबुल कलाम आजाद इस दुनिया को, सदा के लिए अलविदा कह गए ।

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धन्यवाद ।

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