साहसी राजकुमारी

अरावली की दूर तक फैली पहाड़ियों में हरे भरे वृक्ष लहलहा रहे थे संध्या का समय  था भानगढ़ की राजकुमारी किले की छत से प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले रही थी अचानक उसके मन में घुड़सवारी का विचार आया राजकुमारी रत्नावली ने अपने तलवार उठाई धनुष बाण लिया और घोड़े पर सवार होकर  चल दी  किले की घुमावदार गलियों में घोड़ा दौड़ता हुआ जंगल के बीचो-बीच पहुंच गया दूर से सिंघो के दहाड़ने की आवाज आ रही थी पास ही बहती नदी में अनेक   जानवर जल पी रहे थे रहे थे रत्नावली यह देख मन ही मन प्रसन्न हो रही थी वह दूर से आती झरने की आवाज सुन रही थी तभी दूर से आती घोड़ों की आवाज से वह चौक गई पलक झपकते ही उसके सामने मुगल सैनिक खड़े थे

“बहुत खूबसूरत !शायद पूरे देश में आप जैसी खूबसूरत शहजादी नहीं है”मलिक कफूर बोला

वह अपनी छोटी सी सैनिक टुकड़ी के साथ वहां आया था यह सुनते ही राजकुमारी का चेहरा क्रोध से तमतमा उठा वह बोली ,

“मलिक काफूर ,शायद ही पूरी धरती पर तुम जैसा नीच और गद्दार कोई और होगा अपनी जान बचाना चाहते हो तो अभी लौट जाओ और फिर कभी भानगढ़ की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखना “

राजकुमारी की बातें सुनकर मलिक कफूर मुस्कुराकर बोला ,

“बहुत खूब! आपने हमें पहचान लिया अब आप यह भी जान लीजिए कि हम आपको ही लेने आए हैं  मेरे सैनिक भी जल्द ही यहां पहुंचेंगे मैं अब अलाउद्दीन को यह अनोखी भेंट दूंगा तो बड़ा इनाम पाऊंगा”

“अच्छा !मैं तुम्हें यह अवसर दूंगी तब ना “!

यह कहते ही रत्नावली ने फुर्ती से बाण चलाए और देखते ही देखते मलिक कफूर की तलवार दूर जा गिरी रत्नावली मुगल सैनिकों पर टूट पड़ी कुछ ही देर में सारे सैनिक मारे गए यह देखकर मलिक कफूर उल्टे पैर  भागा

राजकुमारी रत्नावली बोली ,”कायर अब कहां भागे जा रहा है देख मैं अपनी जन्मभूमि पर बुरी नजर डालने वालों को कैसे भेज देती हूं जमीन पर पड़े अपने साथियों को तो लेता जा “

मलिक कफूर आगे बढ़ता गया और उसने मुड़ कर भी नहीं देखा रत्नावली ने घोड़ा  वापस किया और किले की और चल दी

शिक्षा :-प्रत्येक कार्य को धैर्यपूर्वक और साहसपूर्ण करना चाहिए वीरता से किए गए कार्य का फल हमेशा सुखदाई होता है

लेखक :-दीपक कोहली 9690324907

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