वेश्या

एक औरत का मुंह बन्द करने उसे गलत साबित करने का अचूक बाण है कि उसे वेश्या बुलाया जाये. इसके लिए औरत का वेश्या होना भी ज़रूरी नहीं होता, बस औरत है यही काफी है.
यूं तो किसी के लिए ये भूखे पेट को भरने का ज़रिया है तो किसी के लिए ये महज़ एक गाली से ज़्यादा कुछ नहीं, वहीं समाज इसकी गोद में बैठकर भी इसके अस्तित्व को सिरे से नकार देता है…
शादी होने वाली है सेक्स का अनुभव नहीं है, वेश्याघर जाया जाये
बीवी माँ बनने वाली है, उसके साथ अब शारीरिक सम्बंध बनाने को डॉ. ने मना किया है, पर शरीर की मांग तो पूरी करनी ही पड़ेगी, तो याद आती है वेश्या.
वैवाहिक जीवन में कुछ नया नहीं है, तो रुख़ करते हैं वेश्या का.
साहब आ रहे हैं फलानी जगह, कोई लड़की भेजो साहब की खातिरदारी के लिये.
ना जाने कितने बहाने से वेश्या का रोज़गार चलता है, अपनी मांग पूरी कर लेने के बाद ये नामर्द उसकी चौखट लांघते ही पीठ फेर गाली बकने से नहीं चुकते, क्या करे जिस घिनोने काम को बन्द कमरे में ये नये-नये तरीके इज़ाद करके करते हैं, वही काम बाहर रोशनी में आते ही काला हो जाता है.
खुद की कभी ना मिटने वाली भूख प्यास को बुझाने का बन्दोबस्त करने के लिए आप वेश्या की दुकान लगाते हैं, उसे चलाते हैं, फिर सीना तान के वेश्या को गाली देते हैं, यकीनन वो वेश्या हो गई, पर पेंट में फंसे दिमाग पर थोड़ा ज़ोर डाल के बताईये, क्या उस बिस्तर पर वो अकेली थी..??
औरत को चरित्रहीन कह कर जो लोग अपने चरित्र के साफ होने का दावा ठोकते हैं, यही लोग रात को वेश्या के साथ बिस्तर तोड़ते हैं..
जिस काम को दो लोग मिलकर करें,उसके लिए किसी एक को ही शर्मसार होना पड़े, समाज से अलग-थलग रहना पड़े, गालियां सुननी पड़े ये कौन सा समाज है, मैं कोई नारीवादी नहीं हूँ पर समाज के इस दोगलेपन से मुझे नफ़रत है और हमेशा रहेगी.
वेश्या अगर बाज़ार में बिकने वाली एक चीज है तो भूलिये मत आप ही उसके ग्राहक हैं क्योंकि बिना_ग्राहक_के_दुकान_नहीं_चलती साहब,ये बाज़ार का नियम है…!!

आभार :- राधिका चौधरी
Comrade Radhikaa Choudhary

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