::::::::::::मेरी अनचाही बेटी:::::::::::::

एक शहर में नंदन और बबीता नाम के पति-पत्नी रहते थे नंदन के एक 2 वर्ष का पुत्र था एक दिन जैसे ही नंदन अपने घर पहुंचता है तो उसकी पत्नी बबीता उसे पुनः गर्भधारण की बात बताती है यह सुनकर नंदन की खुशी का ठिकाना ना रहा और वह खुशी के मारे झूम रहा था अब वह रोज भगवान से यही प्रार्थना करता था कि उसे एक और पुत्र की प्राप्ति हो जाए नंदन के पड़ोस में मोहन शर्मा और उनकी पत्नी सरिता शर्मा भी रहती थी मोहन शर्मा अपनी पत्नी से सरिता शर्मा से बहुत प्रेम करते थे लेकिन वह प्रेम अब दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा था क्योंकि 5 साल बाद भी सरिता शर्मा की गोद सुनी थी यह बात मोहन शर्मा को दिन प्रतिदिन खाए जा रही थी अब उनका मन न तो काम में लगता है और ना ही परिवार में लगता था वह हमेशा अकेले ही रहते थे एक दिन नंदन और नंदन की पत्नी बबीता मोहन शर्मा के घर जाते हैं और उन्हें पुनः गर्भधारण की बात बताते हैं यह सुनकर मोहन शर्मा और उनकी पत्नी दिखावटी मुस्कुराहट के साथ मुस्कुराते हैं और मन ही मन बहुत गहराई में पहुंच जाते हैं एक दिन अचानक नंदन की पत्नी की तबीयत खराब हो जाती है और वह उसे लेकर अस्पताल जाता है आज सुबह से ही बबीता को पेट में दर्द की शिकायत थी काफी रात होने के बाद नंदन घर नहीं आता है तो मोहन शर्मा और उनकी पत्नी उन्हें देखने अस्पताल चले जाते हैं जैसे ही वह अस्पताल के पास पहुंचने वाले थे उन्होंने देखा कि रास्ते में नंदन जैसा व्यक्ति एक सुनसान इलाके में जा रहा था तो वह उसके पीछे जाने लगते हैं वह आगे चल कर देखते हैं कि वह एक कपड़े में कुछ लपेट कर ले जा रहा था और उसे एक गड्ढे में दबाने की कोशिश कर रहा था उन्होंने जाकर नंदन को रोका तो नंदन उनसे कहने लगा कि उसकी पत्नी को लड़की हुई है और वह इस लड़की को नहीं चाहता उसे सिर्फ लड़का चाहिए इसलिए उसे गड्ढे में दबा रहा था यह सुनकर मोहन शर्मा और उनकी पत्नी दंग रह जाते हैं तभी मोहन शर्मा की पत्नी उस बच्ची को गोद लेने की बात कहती हैं और नंदन इस बात पर सहमत हो जाता है और कहता है कि तुम रातों रात इस शहर को छोड़कर चले जाओ और कभी जिंदगी में यह बात मेरी पत्नी को नहीं बताना क्योंकि मैं उसे बच्ची को मरने की बात बता कर आया हूं उस बच्ची को लेकर मोहन शर्मा और उनकी पत्नी उस शहर को छोड़कर चले जाते हैं
लगभग 20-25 साल बाद जैसे ही एक दिन अचानक नंदन बैंक जा रहा था तो उसे रास्ते में एक कार आती दिखाई दी उसने उस कार को हाथ दिया और बैंक तक छोड़ने को कहा वह कार में बैठकर बैंक पहुंच जाता है और बैंक मैनेजर से मिलने के लिए लाइन में लग जाता है जैसे ही नंदन का नंबर बैंक मैनेजर से मिलने का आता है तो वह देखकर दंग रह जाता है की यह तो वही लड़की है जिसकी गाड़ी में मैं बैठ कर आया था वह उसका आचरण देकर उससे प्रभावित होता है वह लड़की जिसका बैंक मैनेजर की प्लेट पर नाम अंजली शर्मा लिखा था उसे अपने घर आने को कहती है जैसे ही नंदन बैंक मैनेजर अंजली शर्मा के घर पहुंचता है तो वहां पर मोहन शर्मा और उनकी पत्नी सरिता शर्मा को देख कर हैरान रह जाता है और इनसे कहता है कि आप यहां पर कैसे ?
इतने मोहन शर्मा और उनकी पत्नी सरिता शर्मा कुछ कह पाती बैंक मैनेजर अंजलि शर्मा वहां पहुंचती है और नंदन से अपने मां बाप का परिचय कराती है यह देख कर नंदन अंजली शर्मा के पैरों में गिरकर फूट-फूटकर रोने लगता है और उसे सारी बात बताता है कि वह उसकी बेटी है और उसे अपने साथ ले जाने के लिए कहता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी अब उसकी खुद की बेटी ही उसे धिक्कार कर घर से बाहर निकाल देती है और अपने माता पिता को गले से लगाकर रोने लगती है
शिक्षा :-
बेटियों को कभी भी बेटों से कम नहीं आंकना
चाहिए और उन्हें समान अवसर प्राप्त कराने
चाहिए क्योंकि बेटियां भी आंखों का तारा होती है
तब बेटे साथ छोड़ जाते हैं तब बेटियां ही बूढ़े माता
पिता को आप बनाती हैं

“मेरी बेटी मेरा मान”- दीपक कोहली
लेखक:- दीपक कोहली
(9690324907)

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