मुनि वाहन या धोखा

आज हैदराबाद में मुख्य पुजारी रंगराजन ने एक दलित पुजारी को अपने कंधे पर बैठाकर मंदिर का कार्य भार सौंपा। सराहनीय, अतुलनीय। अब बस सामूहिक भोज, सामूहिक विवाह यानी रोटी बेटी का रिश्ता जोड़ दीजिये क्योंकि जातिय द्वेष का अंत, अंतर्जातीय विवाह और अंतर्जातीय सम्बन्ध ही हैं। अन्यथा यह केवल एक फरेब और दिखावे से अधिक और कुछ नही है। जिससे आपको कुछ उदाहरण बने रहे और आपके आरक्षण पर बहस न हो सके। आप रोटी बेटी की एकमात्र पहल कीजिये फिर देखीये हम आरक्षण के खिलाफ खड़े मिलेंगे। तबतक यह भी केवल एक नाटक मात्र लगेगा जिसमे 2700 वर्ष लग गए आपको एक फैसला लेने में। लेकिन देर से आये हो तो दुरुस्त होकर आओ।!

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