मजेदार शिक्षाप्रद कहानी : गधाऔर मुर्गा

        गधा और मुुर्गा

किसी गांव मे एक कुम्हार रहता था । कुम्हार के पास कई गधे थे जिनसे वह मिट्टी ढोने का काम करता था । कुम्हार के पास एक मुरगा भी था । मुरगा गधों मे से एक गधे को बहुत प्यार करता था । वह उसका पक्का मित्र भी था ।

         एक बार गधा बीमार पड गया । वह लगातार कमजोर होता जा रहा था । डॉक्टर ने तीन दिन गधे को दवाई देने के लिए कुम्हार से कहा । और कहा कि यदि चौथे दिन गधा ठीक न हुआ तो इसे कसाई को उठवा देना । मुरगा अपने मित्र की बीमारी से बहुत चिंतित था । जब कुम्हार गधे को दवाई देकर जाता तब मुरगा अपने दोस्त गधे से उठकर चलने के लिए कहता । गधा दवाई से ठीक होता जा रहा था लेकिन वह काम से बचने के लिए मक्कारी कर रहा था ।         चौथे दिन डॉक्टर जब गधे को दवाई दने आया .दवाई लगते ही गधा हिनहिनाकर खडा होकर चलने लगा । ऐसा देखकर कुम्हार को बहुत खुशी हुई । मुरगा अपने मित्र गधे को उठ खडा देख बहुत प्रसन्न हुआ । कुम्हार डॉक्टर से बोला , मै आज बहुत खुश हूँ डॉक्टर साहब, आपने मेरे गधे की जान बचाकर मुझ पर बडा उपकार किया है। आज दावत मे मुरगा कटेगा !!!

     दोस्तो , किसी के विषय मे इतना भी मत सोचिये ,जिससे आपको मुरगा बनकर कटना पडे ।

              लेखक:  जयवीर सिंह

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