बड़ी हसीन होगी तू ऐ! नौकरी

बड़ी हसीन होगी तू ऐ! नौकरी

बड़ी हसीन होगी तू ऐ! नौकरी

सारे युवा आज तुझपे ही मरते हैं

सुख चैन खोकर चटाई पर सोकर

सारी रात जागकर पन्ने पलटते हैं

दिन में तहरी और रात को मैगी

आधे पेट ही खाकर तेरा नाम ही जपते हैं

सारे युवा आज तुझपे ही मरते हैं

अंजान शहर में छोटा सस्ता कमरा लेकर

किचन बैडरूम सभी उसी में सहेजकर

चाहत में तेरी अपने मां और बाप

और दोस्तों से दूर रहते हैं

सारे युवा आज तुझपर ही मरते हैं

राशन की गठरी सिर पर उठाये

अपनी मायूसी और मजबूरियां छुपाये

खचाखच भरी ट्रेन में बिना टिकट

स्वयं रिस्क लेकर सफर करते हैं

सारे युवा आज तुझपे ही मरते हैं

इंटरनेट और अखबारों में तुझको तलाशते

तेरे लिए पत्र पत्रिकाएं पढ़ते-पढ़ते

32 साल तक के जवान कुआंरे फिरते हैं

सारे युवा आज तुझपे ही मरते हैं

तू कितनी हसीन होगी ऐ!नौकरी

सारे युवा आज तुझपे ही मरते हैं।

 

लेखक :- चन्द्र किशोर

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