बेटियों के लिए कुछ लाइन

 

बेटियों के लिए कुछ लाइन

बोए जाते हैं बेटे.. पर उग जाती हैं बेटियां,

खाद पानी बेटों को.. पर लहराती हैं बेटियां,

स्कूल जाते हैं बेटे… पर पढ़ जाती हैं बेटियां,

मेहनत करते हैं बेटे.. पर अव्वल आती हैं बेटियां,

रुलाते हैं जब खूब बेटे.. तब खूब हंसाती हैं बेटियां,

नाम करें या ना करें… पर नाम कमाती हैं बेटियाँ,

जब दर्द देते हैं बेटे.. तब मरहम लगाती हैं बेटियाँ,

छोड़ जाते हैं जब बेटे.. काम आती हैं बेटियाँ,

आशा रहती है बेटों से.. पर पूर्ण करतीं हैं बेटियां,

हजारों फरमाइश से भरे हैं बेटे.. पर समय की नजाकत को समझती हैं बेटियां,

बेटी को चांद जैसा मत बनाऔ कि सब घूर कर देखें,

किंतु, बेटी को सूरज जैसा बनाऔ ताकि घूरने से पहले सभी की नजर झुक जाये।।

लेखक :- चन्द्र किशोर

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