बलिदान का इतिहास “पन्नाधाय”

चित्तौड़गढ़ के राणा संग्राम सिंह की मृत्यु के पश्चात चित्तौड़गढ़ का वास्तविक अधिकारी उदय सिंह था परंतु वह अल्पवयस्क था अतः चित्तौड़गढ़ की गद्दी उदय सिंह के संरक्षक और संग्राम सिंह के भतीजे बनवीर को सौंप दी गई बनवीर राज्य को पूर्ण रुप से हासिल करने के लिए उदय सिंह की हत्या का षड्यंत्र रचने लगा उसने राज्य में “मयूर पक्ष” नामक कुंड में दीपदान महोत्सव का आयोजन किया पन्ना उदय सिंह की धाय मां थी जिसे बनवीर द्वारा बनाए गए षड्यंत्र की जानकारी मिल गई थी उदय सिंह पन्नाधाय से दीपदान महोत्सव में जाने का आग्रह करता है लेकिन पन्नाधाय उनके आग्रह को ठुकरा देती है और उदय सिंह पन्नाधाय से रूठ जाते हैं यह देखकर बनवीर सोना को पन्नाधाय के पास उदय सिंह को लेने के लिए भेजता है सोना उदय सिंह को दीपदान महोत्सव में ले जाने लगती है लेकिन पन्नाधाय उसे फटकार कर भगा देती है इसी समय पन्ना का पुत्र चंदन उस कमरे में आता है और उदय सिंह के साथ भोजन करने के लिए कहता है लेकिन पन्नाधाय चंदन से उदय सिंह के सोने की बात कह देती है यह सुनकर चंदन वापस चला जाता है चंदन के जाने के पश्चात दासी शामली पन्ना के पास घबराते हुई आती है और उसे बनवीर द्वारा विक्रमादित्य को मारने की खबर सुनाती है और यह भी बताती है कि बनवीर अब उदय सिंह की हत्या करने वाला है वह कहती है इस राज महल के चारों ओर बलबीर के सैनिक हैं शामली की आवाज सुनकर पन्ना बहुत बेचैन हो जाती है वह उदय सिंह को ले कर भागने की सोचती है परंतु महल को सैनिकों ने घेर रखा था इसी समय महल की झूठन उठाने वाला कीरत वहां टोकरी लेकर आता है और पन्ना को अपनी योजना बताता है कि वह उदय सिंह को टोकरी में छुपा कर महल के बाहर ले जा सकता है पन्ना कीरत की योजना से सहमत हो जाती है और कीरत उदय सिंह को महल के बाहर ले जाता है कीरत के जाने के पश्चात पन्ना उदय सिंह के स्थान पर अपने पुत्र चंदन को सुला देती है और इस प्रकार पन्ना धाय उदयसिंह के प्राणों की रक्षा करती है तभी बलवीर क्रोधित होता हुआ पन्ना के कमरे में आता है और उदय सिंह के बारे में पूछता है बनवीर उदय सिंह के स्थान पर सोए हुए चंदन पर अपनी तलवार से वार करता है लेकिन पन्नाधाय बनवीर पर अपनी कटार से वार करती है लेकिन बनवीर पन्ना के कटार के बार से बच जाता है और पन्ना को स्त्री समझ कर छोड़ देता है और पन्ना के पुत्र चंदन की हत्या कर देता है

इस प्रकार पन्ना धाय उदय सिंह को बचाने के लिए अपने पुत्र चंदन का बलिदान कर देती है इतिहास में आज भी पन्नाधाय के बलिदान को स्वर्णिम अक्षरों में वर्णित किया जाता है

लेखक :- दीपक कोहली
(9690324907)

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