पछतावा

पछतावा

     पछतावा :- एक मेहनती और ईमानदार नौजवान बहुत पैसे कमाना चाहता था क्योंकि वह गरीब था और बदहाली में जी रहा था। उसका सपना था कि मेहनत करके खूब पैसे कमाये और एक दिन अपने पैसे से एक कार खरीदे। जब भी वह एक कार देखता तो उसे अपनी कार खरीदने का मन करता।

     कुछ साल बाद उसकी अच्छी नौकरी लग गई। उसकी शादी भी हो गई और कुछ ही वर्षों में वह एक बेटे का पिता भी बन गया। सब कुछ ठीक चल रहा था मगर उसे फिर भी एक दुख सताता था कि उसके पास उसकी अपनी एक कार नहीं थी। धीरे-धीरे पैसे जोड़कर एक कार खरीद ली। कार खरीदने का उसका सपना पूरा हो चुका था और इससे वह बहुत खुश था। वह कार की बहुत अच्छी तरीक़े से देखभाल करता था और शान से घुमाता था।

     एक दिन रविवार को वह कार रगड़-रगड़ कर धो रहा था। यहां तक कि कार के टायरों को भी चमका रहा था। कार धोते-धोते अचानक उस आदमी ने देखा कि उसका बेटा कार की बोनट पर किसी चीज से खुरच – खुरच कर कुछ लिख रहा है।

     यह देखते ही उसे बहुत गुस्सा आया। वह अपने बेटे को पीटने लगा उसे इतनी जोर से पीटा कि उसके बेटे के हाथ की एक उंगली ही टूट गई।

     दर असल वह अपनी कार को बहुत अधिक चाहता था और वह बेटे की इस शरारत को बरदाश्त नहीं कर सका। बाद में जब उसका गुस्सा कम हुआ तो उसने सोचा कि जाकर देखूं कि कार में कितनी खरोंच लगी है। कार के पास जाकर देखने पर उसके होश उड़ गए। उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था। वह फूट – फूट कर रोने लगा कार पर खुरचकर उसके बेटे ने लिखा था।

     Papa, I love you.

     यह कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी के बारे में कोई गलत राय रखने से पहले या गलत फैसला लेने से पहले हमें ये जरूर सोचना चाहिए कि उस व्यक्ति ने वह काम किस नियत से किया है।

लेखक  चन्द्र किशोर

9458511577

 

 

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