::::::नारियल का प्रदेश :::::::

भारत एक विशाल देश है यहां कहीं पहाड़ है तो कहीं मरुस्थल कहीं  वन हैं तो कहीं मैदान !

यहां के सभी प्रदेशों का अपना अपना सौंदर्य है भारत के दक्षिणी भाग में स्थित एक राज्य है- केरल 

क्षेत्रफल की दृष्टि से यह एक बड़ा राज्य नहीं है लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य से यह हरा-भरा है बहुत से लोग इसे “ईश्वर का प्रदेश” मानते हैं

हरे-भरे वृक्षों और पौधों से इस प्रदेश को “हरित प्रदेश”कहना भी अनुचित नहीं होगा समुद्र तट पर स्थित तिरुवंतपुरम केरल की राजधानी है

केरल में हरे भरे जंगलों की बहुतायत है सड़कों के दोनों और चाय, रबड़ ,इलायची और काली मिर्च के बागान देखते ही बनते हैं यहां स्थित लहलहाते खेत और नारियल के वृक्ष बड़े सुंदर लगते हैं नारियल यहां की प्रमुख पैदावार है केरल एक समुद्र तटीय क्षेत्र है इसलिए यहां खूब वर्षा होती है यहां की आद्र जलवायु से गर्मी भी बहुत पड़ती है और वातावरण में नमी बनी रहती है केरल के गांव किसी भी प्रकृति प्रेमी का मन मोह लेंगे यहां के गांव के घर मिट्टी ,नारियल की टहनियों और पत्तियों से बने होते हैं

केरलवासियों को साफ सुथरे घरों में रहना पसंद है बे घर के आंगन को फूलों की रंगोली से सजाते हैं गांव के अधिकतर लोग धान की खेती करते हैं नारियल के रेशों से रस्सी और दरिया बनती हैं ग्रामवासी नारियल की टोकरी तथा अन्य सजावटी वस्तुओं को भी बनाते हैं

इन वस्तुओं को शहरों में ले जाकर बेचते हैं केरल में हाथी बहुतायत में पाए जाते हैं वनों में स्वतंत्र विचरण करने वाले हाथी सभी का मन मोह लेते हैं केरलवासी हाथियों को पालते हैं और उनसे भारी लकड़ी के गट्ठर एवं अन्य भारी सामानों को उठाते हैं केरल के मंदिरों में भी पालतू हाथी देखने को मिल जाते हैं केरल का मुख्य त्योहार ओणम है 4 दिनों तक चलने वाला यह तो त्योहार फसल की कटाई के बाद मनाया जाता है  केरलवासियों का विश्वास है कि इस दिन पौराणिक राजा महाबली अपने राज्य में घूमने के लिए आते हैं इस त्यौहार द्वारा केरलवासी अपने राजा का स्वागत सत्कार करते हैं

इस दिन लोग अपने अपने घरों के सामने रंगोली सजाते हैं घरों को फूलों से सजाया जाता है सब लोग नए कपड़े पहनते हैं घाघरा चोली पहनने और बालों को वेड़ी सजाए महिलाओं की शोभा देखते ही बनती है घरों में तरह तरह के पकवान बनते हैं नौका दौड़ केरल का प्रमुख आकर्षण है यह नौका दौड़ सजी रंग बिरंगी नौकाएं देखने वालों का मन मोह लेती हैं त्रिचूर में मनाए जाने वाला उत्सव भी बहुत प्रसिद्ध है शानदार आतिशबाजी छतरी युक्त हाथियों की और छाता प्रतियोगिता इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होते हैं दूर-दूर से हजारों लोग त्रिचूर के इस उत्सव को देखने आते हैं

केरल वासियों को स्वादिष्ट भोजन पसंद है केरल के लोग आमतौर पर मछली और चावल खाते हैं खाने पीने की वस्तुओं में नारियल और उसके तेल का मठ लोग बहुतायत प्रयोग करते हैं यद्यपि शहरों में और अन्य खाद्य तेलों का उपयोग होने लगा है कथकली नृत्य खेल की पहचान है यह नृत्य आसान नहीं होता कई वर्षों तक अभ्यास करने के बाद ही नृतक इसमें प्रवीण होता है यह नृत्य करने वाले नृतक विशेष प्रकार के रंग बिरंगे मुखोटे पहनकर नाचते हैं

“मलयालम ” केरल की मातृभाषा है यहां के पढ़े-लिखे लोग तमिल भी बोलते हैं बल्कि इन विशेषताओं तथा प्राकृतिक सौंदर्य की प्रचुरता को देखते हुए यदि इसे “प्रकृति का स्वर्ग “कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी

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