दहेज प्रथा एक सामाजिक कोढ

अस्सलाम ओ अलैकुम
वालैकुम अस्सलाम भाई
कैसे हो आप
जी अल्लाह का शुक्र है
अच्छा भाई आपका कोई लड़का है सुना हूँ
हां भाई है एक फलानी कंपनी में काम करता है
ओह माशाअल्लाह
अच्छा भाई साहब मेरी एक बेटी है उसके लिए लड़का देख रहा हूँ अगर आपको मेरी बेटी पसंद आये तो बात आगे बढ़ाए कुछ

अरे भाई साहब मेरा बेटा तो लाखों में एक है फलां साहब इतना जहेज दे रहें हैं

देखिये भाई साहब मेरी ज्यादा औकात तो न है पर जितना हो सकेगा दूंगा

अरे नहीं भाई साहब कहीं और देख लो मेरे लड़के का रिश्ता फलाने सेठ के घर पर होगा उसको भी पसंद है वो लड़की

ओह्ह अच्छा भाई साहब कोई बात नहीं????

आज समाज में अक्सर लोगों का यही हाल है जिनके बच्चे थोड़े लायक होते हैं
10/20 कमा लिया तो 2/3 लाख का माल तो आराम से भीख में ले लेता है और गरीब की लड़की लेने में उसकी नानी मां याद आती है
और आज जो भी मामलात सुनने को आते हैं कि फलां की बेटी भाग गई यह हुआ ऐसा हुआ वैसा हुआ तो याद राखियों उन सबके जिम्मेदार यही वो लोग है जो 2/4 लाख जेब मे लेकर लड़का ढूढने निकलते हैं
मेरा खुद का तज़र्बा है देखा हूँ बेहतरीन नेक लड़कियां सिर्फ पैसों की कमी से गलत लोगों के हाथ जा रहीं हैं
कुछ दिन बाद ही झगड़े मार लात खा कर वही लड़की अपने घर बैठती है फिर यही समाज तमाशा देखता है

आज लगभग हर समाज मे जहेज की लानत से लोग परेशान हैं लड़कियां जलाई जा रही हैं मारी जा रहीं हैं मगर अफसोस इसके लिए कोई अनशन नहीं कोई धरना नहीं
मगर यही लड़की का जब रेप होता है तो वोटों की खातिर अपनी संस्था को चमकाने की खातिर बहुत लोग आगे आते हैं
याद रखो यह जो सब हो रहा है हम सबकी नजरों के सामने उसके जिम्मेदार हम खुद होंगे क्या जवाब देंगे अल्लाह को ?

आओ अहद करते हैं आज हम खुद बचेंगे इस लानत से और लोगों को समझायेंगे बताएंगे
नोट: मुझे पता है कि यहां लिखने से तो शायद कुछ न फर्क पड़े पर सब तक मेरी बात रखने का एक जरिया है यह आप सब भी लिखिए और हो सके तो अमली जामा पहनाइए
इंशाअल्लाह कौम कौम की बेटियां जलील होने से बचेंगी 😷😷
Cp
चौधरी सखावत

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