डिजिटल महाभारत फाइनल भाग

डिजिटल_महाभारत_फाईनल

जय श्रीराम! भारत माता की जय हो।

कौन है संजय? यह आवाज पहले तो कभी नहीं सुनी और हमारी जयकार करने के बजाय किसी भारत की माता जी की जय कर रहा है मूर्ख।

लो कर लो बात.. अरे महाराज। अपने देश में भारत माता की जय नहीं करेंगे तो क्या पाकिस्तान आंटी की जय करेंगे। वामपंथियों की भाषा मत बोलिये महाराज। हम संबित पात्रा हैं और सीधे इंद्रप्रस्थ यानि के दिल्ली से आ रहे हैं।

लेकिन आ किसलिये रहे हो दुष्ट

और लो.. क्या मोदी जी के राज में हिंदुओं को कहीं जाने की पर्मीशन लेनी पड़ेगी। अरे अधिकृत प्रवक्ता हैं अपनी पार्टी के। एक साधारण सी महाभारत थी आपके पास.. वह तो अहसान मानिये हमारे आदमी का, कि उसने महाभारत को डिजिटल बना दिया और आज आप इतने सारे माॅनीटर्स पर यह लाईव एक्शन देख पा रहे हैं।

महाराज.. यह नारद जी के अपडेटेड वर्शन लगते हैं। बैठिये महोदय.. और अपने आने का औचित्य बताइये।

अरे भई डिबेट के रोगी हैं.. बिना डिबेट के पेट की गैस नहीं छूटती। कोई न मिले तो आइने के सामने बैठ कर खुद से डिबेट कर लेते हैं जबकि यहां तो आप जैसे दो सज्जन पुरुष मौजूद हैं।

लेकिन किस विषय पे डिबेट करेंगे

महाभारत पर और किस विषय पर.. कमाल करते हैं संजय जी। मैदान सज चुका है, दोनों टीमें भिड़ने को तैयार हैं और अब दो ही बातें होंगी। या तो आप के लौंडे लपेटे जायेंगे या पांडू के और आपके लपेटे गये तो दो बातें होंगी। या तो..

अरे चुप कर भाई.. संजय तुम युद्ध की कमेंट्री स्टार्ट करो।

महाराज.. जंग छिड़ चुकी है, पूरा स्टेडियम ‘महाभारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारों से गूंज रहा है, लेकिन समझना मुश्किल है कि महाभारत के टुकड़े कैसे होंगे। भीम उधर वाट लगाये दे रहा है और अर्जुन अलग.. युधिष्ठिर निंदास्त्र नाम का नयी टेक्नालॉजी वाला हथियार चला रहा है और नकुल सहदेव ईवीएम टेंपरिंग में लगे हैं। हमारी टीम के भी सभी योद्धा लंका लगा रहे हैं, पितामह भी, द्रोण, कृपा और दुर्योधनादि के साथ मिल कर आग मूत रहे हैं लेकिन गरीब बीपीएल कार्डधारक सैनिकों के विकेट पर विकेट गिरे जा रहे हैं

यहां एक बात मैं कहना चाहूँगा कि बीपीएल कार्डधारकों के लिये टसुए मत बहाइये.. इन्हीं लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये थे। वह तो अहसान मनाइये हमारी दरियादिली का कि फिर भी उन्हें हम स्वर्ग में सैकड़ों अप्सरायें दिला रहे हैं.. बस आधार कार्ड रहना चाहिये साथ।

लीजिये कृपाचार्य का विकेट गिर गया..

देखिये महामहिम.. इसपे आंसू बहाने की जरूरत नहीं। यह आदमी ठीक नहीं था.. पटेल को प्रधानमंत्री बनाने की जब बात उठी थी तब इन्होंने ही नेहरू के पक्ष में मतदान किया था। इनकी तो हूरों पर भी अट्ठाइस पर्सेंट जीएसटी लगेगी।

ओह महाराज.. हमारी टीम ने चक्रव्यूह बना कर अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू का वध कर दिया।

अरे क्या बात कर रहे.. चक्रव्यूह तो हमारे अमित शाह जी रचते हैं कि आदमी उठता नहीं, बंसल और लोया की तरह उठ जाता है। बहरहाल कैप्टन अभिमन्यु की शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी.. पाकिस्तान से पूरा बदला लिया जायेगा।

अरे आप हो किसकी तरफ आखिर

मतलब क्या इस देश में हिंदुओं को इतना अधिकार भी नहीं कि वह दोनों तरफ रह लें। अजी हम तो हमेशा उधर हैं जिधर से मारा जाये। चौरासी के दंगों में ‘उधर’ से मारने का सुख ले लेते हैं, दो हजार दो के दंगों में ‘इधर’ से ले लेते हैं.. लेने के लिये मिलनी चाहिये

क्या

आप उसकी चिंता न कीजिये, वह हमारी हेडएक है। आप उधर की चिंता कीजिये.. वह देखिये कर्ण ने घटोत्कच को, अर्जुन ने कर्ण को और धृष्टद्युम्न ने द्रोण को भी निपटा दिया है।

तो हमारे शूरवीर योद्धा क्या एक बाल भी नहीं उखाड़ पा रहे

कैसे उखाड़ें महाराज.. जैसे ही हमारा कोई योद्धा हावी होता है, केशव शंख बजा कर स्ट्रेटेजिक टाईम आउट ले लेते हैं।

उफ यह केशव

और लो.. मलब अपने ही देश में अब हिंदू टाईम आउट भी नहीं ले सकता। उसके लिये यूएन से पर्मीशन लेनी पड़ेगी।

ओह .. क्या होगा मेरे पुत्रों का

वे अभी भी लाठी भांज रहे हैं जेड सिक्योरिटी में.. लेकिन भीम ने जेड सिक्योरिटी का घेरा तोड़ के दुशासन की ऐसा बोल्ड किया है कि अब द्रौपदी उसके खून से शैम्पू कर सकती है।

मेरा बच्चा

यह गलत बात है वैसे.. और मैं इसकी कड़ी एवं कठोर निंदा करता हूँ। बताइये, शैम्पू करने के लिये ब्लड! कहां की सभ्यता है यह.. यह तुर्कों अरबों की खूनी परंपराओं से बचने की जरूरत थी हम हिंदुओं को.. लेकिन भाभी जी ने इसे शान समझ लिया। अरे मोदी से कह देतीं.. हमारे पास थोड़े टेढ़े फर्मे का योगी है एक, जो पतंजलि के नाम पे देसी रायता फैलाता है.. वह शुद्ध स्वदेशी शैम्पू बना देता लेकिन बताइये भला.. खून।

महाराज.. पितामह ने पांडवों के कई सैनिकों को निपटा दिया है लेकिन वासुदेव ने छल से शिखंडी को आगे करके अर्जुन से पितामह को ठुंकवा दिया है और अर्जुन ने पितामह के शरीर को ही तीरों का बेड बना दिया है और अब जमीन से मिनरल वाटर निकाल के पिला रहा है।

आहा.. मेरे भीष्म जी

अहहहह.. यह देखिये, बिरयानी खिलाई जा रही है कसाब को। मलब इस देश में हिंदु सदा से सहिष्णु रहा है.. देख लीजिये, आदमी मार दिया है लेकिन फिर भी उसके हलक में पानी टपका कर उसे जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है। इसी सहिष्णुता की वजह से मुगलों और अंग्रेजों ने आठ सौ साल हमपे राज किया है।

अब मेरे पुत्रों का क्या होगा

महाराज.. बड़े ही खेद के साथ बताना पड़ रहा है कि भीम ने सिक्योरिटी घेरा तोड़ दिया है और अब आपके पुत्रों को दौड़ा दौड़ा कर मार रहा है।

.. RIP

अहा.. जरा यह आंसू देखिये महोदय.. मैं पूछता हूँ कि क्या इस देश में हिंदू हमेशा मार खायेगा। अगर मारेगा तो क्या इस तरह आंसू बहाये जायेंगे? अरे तब कहां थे यह आंसू जब कश्मीर से हमारे हिंदू भाइयों को मार मार के भगाया गया था, उनके घरों की बर्निंग ट्रेन बनाई गयी थी और बहु बेटियों की आबरू को अरबी कदमों तले रौंदा गया था और आज रोना आ रहा है।

तो आप क्या चाहते हैं कि मैं अपने पुत्रों के विकेट गिरने पे आंसू भी न बहाऊं।

बहाइये.. लेकिन साथ ही आपको चौरासी के सिखों के लिये और दो हजार दो के गोधरा के शहीदों के लिये भी आंसू बहाने चाहिये वर्ना तुष्टीकरण के यह आंसू आपकी आंखों की रोशनी ही छीन लेंगे।

लीजिये महाराज.. भीम ने दुर्योधन का भी शिकार कर लिया। दुर्योधन ने आखिरी अपडेट डाली है.. आयम डाईंग विद दुशासन एंड नाइंटी एट अदर ब्रोज.. साथ ही मरते वक्त की सेल्फी भी है।

मेरा लाल.. मेरा बच्चा। है कोई.. है कोई माई का लाल जो मेरे मरते हुए बेटे को लाईक कमेंट दे के उसे मोक्ष दिला सके

आपका लाल तो अब लास्ट स्टेज पे पीला पड़ चुका है.. वैसे भी लाल तो वामपंथी होते हैं और वामपंथी तो लोल होते हैं।

बचा ही कौन है महाराज.. एक मैं नौकरी का हक अदा करते हुए सैड रियेक्ट कर चुका हूँ, एक आप और महारानी गंधारी कर दीजिये।

चाकू दो चाकू.. यह लो मेरा अंगूठा, तब तक इससे रियेक्ट करते रहो मेरे बच्चे को, जब तक स्वंय ब्रह्म जुकरबर्ग आकर यह न कह दें कि बस कर पगले, रुलायेगा क्या.. मुझसे अब और नहीं ‘देखा’ जाता। मैं जा रहा हूँ महारानी के पास.. उनसे भविष्य के मार्गदर्शक मंडल के विषय में विचार विमर्श करना है।

जय श्रीराम.. वंदे मातरम।

अबे भाग यहां से.. संजय अगर यह फौरन यहां से न जाये तो बचे खुचे सैनिकों को बुलवा कर इसे ‘पठानों’ के बीच कैद करवा दो।

अरे जा रहे हैं भई.. नाराज क्यों होते हैं। वैसे भी अब खेल खतम हो चुका तो हमारा यहां क्या काम.. जा के किसी और डिबेट में कुल्ले टिकायेंगे.. हमारा तो काम ही है हिंदुओं का पक्ष रखना। जय मोदिष्मति।

~ अशफ़ाक़ अहमद

201 total views, 1 views today

Leave a Reply