गुरु का आदेश

गुरु का आदेश
किसी स्थान पर एक ऋषि रहते धे । उनके कई शिष्य थे। उनका सबसे प्रिय शिष्य आरुणी था।एक दिन खेत मे पानी भर रहा था ।ऋषि परेशान हो गये फिर उन्होंने आरुणि को खेत की मेढ़ बांधने को कहा। आरुणी तुरंत खेत पहुंचा । कई बार कोशिश करने के बाद भी जब वह मेढ़ न बाँध सका तो पानी के बहाव को रोकने के लिये खुद लेट गया । उसके लेटने से पानी रुक गया ।
शाम हो गयीं जब ऋषि ने आरुणी को नहीं देखा, तो उन्होंने दूसरे शिष्य से पूछा कि आरुणि कहाँ गया है? शिष्यो ने कहा कि आपने ही तो उसे मेड़ बाँधने भेजा है । सब खेत पर पहुंचे ऋषि ने जब आरुणि को पुकारा तो वह उनके सामने दौड़ा आया ऋषि ने उससे पूछा कि तुम अब तक कहाँ थे आरुणि ने कहा कि मैं खेत कि मेड़ बाँधना में असफल रहा था, इसलिए मैंने खुद लेटकर खेत में पानी के वहाव को रोका । आपकी आवाज सुनता ही दौड़ा चला आया, ऋषि अपने शिष्य की भक्ति से बड़े प्रसन्न हुये । उन्होंने कहा कि तुमने मेड़ की उद्दलन कर खड़े हुये हो, इसलिए आज से तुम्हारा नाम उद्दालक होगा । तुमने अपने गुरु की आज्ञा का निष्ठा से पालन किया इसलिए तुम्हें वेद और धर्मशास्त्र स्वतः याद हो जायेंगे । इस तरह आरुणि गुरु के आशीर्वाद से वेद शास्त्र में पारंगत हो गया । गुरु की आज्ञा का पालन करने से जीवन भर की उपलब्धि मिलती है ।
लेखक-जयवीरसिंह (प्रवक्ता) हिन्दी ।

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