कबीर के दोहे

कबीर के दोहे
कबीर खडा बाजार मे, सबकी माँगे खैर ।
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ।।

साँई इतना दीजिये, जामे कुटुम्ब समाय ।
मैं भी भूखा ना रहूँ. साधू ना भूखा जाय ।।

पाहन पूजै हरि मिले. मैं पूजँ पहाड ।
जासे ये चाकी भली. पीस खाये सँसार ।।

काँकर पाथर जोर के. मसजद् लई चिनाय ।
जा चढ मुल्ला बाघ दे . क्या बहरा हुआ खुदा य ।।

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