उपेक्षित नारी

         उपेक्षित नारी

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आप सभी जानते होंगे बिना नारी के सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती । बिना नारी जाति के सभ्य समाज की कल्पना करना मुश्किल ही नहीं, असम्भव भी है ।प्राचीन समय से ही इस पुरुष प्रध़ान समाज मे नारी हमेशा ही उपेक्षित रही है ।जब से वह धरती पर आँखें खोलती है, और जब तक आँखें बन्द नहीं हो जाती, मेरे विचार से तो वह उपेक्षा और लचारी का शिकार बनी रहती है ।

प्रिय मित्रों मैं यहाँ पर आप सभी क़, जो मेरे निजी विचार हैं, दूसरे शब्दों मे कहूँ तो जो मेरा अनुभव है, उसके अनुसार, बेटी की उपेक्षा सबसे पहले एक स्त्री ही करती है । जबकि वह जानती है कि वह भी किसी की बेटी ही है ।यहाँ मेरा मकसद स्त्री को पूर्ण रुप से जिम्मेदार ठहराना नहीं है,यह मेरा अपना मत हो सकता है । पुरुष भी इसके लिए कम उत्तरदायी नहीं है ।एक माँ का अपनी बेटी की उपेक्षा करना ठहराना स्त्री जाति क़ो गाली देने के बराबर होगा । ऐसा करने के पीछे पुरुष का हाथ ही होता है ।

हमें ऐसी विकृति से बचना होगा क्योंकि पृथ्वी पर नारी त्याग की ऐसी साकार मूर्ति है, जिसकी बराबरी पुरूष त़ क्या ? देवी- देवता भी नही कर सकते । हम सभी को नारी का सम्मान करना होगा ,बराबर के अरिकार देने होंगे, उच्च शिक्षित बनाना होगा । तभी सही अथों  मे मनुष्य कहलाने के अधिकारी होगें ।तभी पूर्ण सभ्य समाज का निर्माण होगा ।

किसी ने ठीक ही कहा है – यत्र नारी पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता ।

लेखक :  जयवीर सिंह ( हिन्दी प्रवक्ता)

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