अनपढ़ राजा कुवड्ड प्रजा

एक जंगल के गीदड़ के उसके गाँव के प्रधान से बहुत अच्छे सम्बन्ध थे, वह एक दूसरे की हर बात मानते थे | एक दिन गीदड़ी ने गीदड़ से कहा कि मुझे चूड़ीयां पहननी हैं, जिसके लिए गाँव जाना पड़ेगा, इस पर गीदड़ चिन्तित हो गया, क्योंकि गाँव में सैकड़ों आवारा कुत्ते रहते थे | उसका गाँव जाना मुश्किल था, उसे अपने दोस्त की याद आयी जो कि उस गाँव का प्रधान था | वह गाँव के प्रधान को अपने घर बुलाता है और सारी कहानी सुनाता है, गीदड़ का दोस्त जो कि गाँव का प्रधान है, एक सलाह देता है कि मैं तुम्हें एक पेपर पर लिख कर देता हूँ, जिसे दिखा कर तुम अपना कार्य सम्पन्न कर सकते हो | अगले दिन गीदड़ी को साथ लेकर गीदड़ गाँव की ओर चल देता है तथा गाँव में प्रवेश करता है | जैसे ही वे दोनों गाँव में प्रवेश करते हैं, गाँव के आवारा कुत्ते उन्हें देख लेते हैं और उन पर भौंकना शुरू कर देते हैं, चूँकि उनके पास प्रधान की अनुमति थी इसलिए वे दोनों आगे बढ़ते रहे, लेकिन कुत्ते फिर भी उनके ऊपर भौंकते रहे और ज्यादा करीब आने पर उन पर हमला कर दिया, जिस कारण गीदड़ और गीदड़ी को वापस जंगल की ओर भागना पड़ा, भागता हुये गीदड़ी, गीदड़ से कहती है कि लिखा दिखा दो, लिखा दिखा दो ,तब गीदड़ बोला कि लिखा किसे दिखाऊँ कुबड्डो से पाला पड़ा है |और दोनों निराश होकर वापस अपने जंगल लौट आये |

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